कोलकाता – स्टाफ संवाददाता
भारत में मच्छर और उनसे फैलने वाली बीमारियां आज भी एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई हैं। बावजूद इसके, मच्छरों की मौजूदगी इतनी सामान्य हो गई है कि अक्सर इन्हें नजरअंदाज कर दिया जाता है। इस धारणा को बदलने के लिए गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड (जीसीपीएल) ने अपने सीएसआर अभियान ‘एलिमिनेशन ऑफ मॉस्किटो बॉर्न एंडेमिक डिजीज’ (ईएमबीईडी) के तहत ‘मच्छर है, मेहमान नहीं’ नामक एक जनहित फिल्म लॉन्च की है। यह फिल्म देशभर के परिवारों को यह सोचने पर मजबूर करती है कि हम अपने रोजमर्रा के जीवन में मच्छरों को कितनी आसानी से जगह दे देते हैं। यह पहल जीसीपीएल की उस संस्कृति को दर्शाती है जो समुदायों में वास्तविक बदलाव लाने पर केंद्रित है।
भारत में हर साल डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी मच्छरजनित बीमारियां लाखों लोगों को प्रभावित करती हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य आंकड़ों के अनुसार, केवल 2025 में ही भारत में 1.13 लाख से अधिक डेंगू के मामले दर्ज किए गए। यह आंकड़े मानसून के मौसम के बाद भी मजबूत सामुदायिक जागरूकता और निवारक कार्रवाई की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।
भारत की मेहमाननवाजी की गहरी जड़ों वाली परंपरा, जहां मेहमानों का स्वागत सम्मान के साथ किया जाता है, उसी सांस्कृतिक सोच को इस अभियान ने एक नया मोड़ दिया है। ‘मच्छर है, मेहमान नहीं’ परिवारों को याद दिलाता है कि हर आने वाला व्यक्ति निमंत्रण का हकदार नहीं होता। फिल्म में लोकप्रिय वाक्य ‘पधारो म्हारे देश’ को रचनात्मक रूप से ‘ना पधारो म्हारे देश’ में बदलकर यह संदेश दिया गया है कि मच्छरों का घर के अंदर कभी स्वागत नहीं होना चाहिए।
यह फिल्म इस बात पर ध्यान आकर्षित करती है कि कैसे हमारी रोजमर्रा की आदतें—जैसे कूलर में जमा पानी, खुली बाल्टियां या घर के आसपास के उपेक्षित कोने—अनजाने में मच्छरों के पनपने की जगह बन जाते हैं। मच्छरों को ‘निरुपद्रवी मेहमान’ के बजाय ‘अवांछित घुसपैठिए’ के रूप में पेश कर, यह फिल्म परिवारों को अपने घर और समुदाय को सुरक्षित रखने के लिए सरल निवारक तरीके अपनाने के लिए प्रोत्साहित करती है।
सुधीर सितापति, एमडी और सीईओ, गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड ने कहा, “मच्छरजनित बीमारियां अभी भी एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता बनी हुई हैं। इसके लिए सामूहिक जागरूकता और लगातार व्यवहार में बदलाव की आवश्यकता है। ‘मच्छर है, मेहमान नहीं’ के जरिए हम एक ऐसी सांस्कृतिक अंतर्दृष्टि का उपयोग करना चाहते थे जो भारतीय घरों से गहराई से जुड़ी हो। मेहमाननवाजी के विचार पर फिर से सोचने के माध्यम से, हमें उम्मीद है कि हम लोगों को उन सरल लेकिन प्रभावी निवारक कदमों को उठाने के लिए प्रेरित करेंगे जो उनके घरों और समुदायों को सुरक्षित रखते हैं।”
स्वाति भट्टाचार्य, क्रिएटिव स्टोरीटेलर (जिन्होंने इस फिल्म की पटकथा लिखी है) ने कहा, “भारत में मेहमाननवाजी सिर्फ एक परंपरा नहीं है – यह हमारी सहज प्रवृत्ति है। जैसे हम मेहमानों का स्वागत करते हैं, वैसे ही हम ठहरे हुए पानी और खुले कूड़ेदानों के साथ मच्छरों का भी स्वागत करते हैं। आइए अब मच्छरों को ‘अनफ्रेंड’ करें और एक ‘एंटी-हॉस्पिटैलिटी कव्वाली’ गाएं — मच्छर है मेहमान नहीं।”
इस अभियान के केंद्र में एक विचारोत्तेजक वीडियो फिल्म है जो कहानी और सांस्कृतिक प्रतीकों के माध्यम से परिवारों
