दिल की सेहत पर संकट: मामूली से बदलाव से ज़िंदगी हो सकती है आसान

कोलकाता – स्टाफ संवाददाता

दिल की बीमारी और हाइपरटेंशन भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे) -5 (2021) के अनुसार, भारत में लगभग हर 5 में से 1 वयस्क (एडल्ट) (21.3%) हाइपरटेंशन से पीड़ित है। 60 साल तथा इससे अधिक उम्र के लोगों में यह आंकड़ा लगभग 48% तक पहुंच जाता है और इससे स्पष्ट है कि भारत में इन परेशानियों के जल्द पहचान और बचाव की ज़रूरत है। हाई ब्लड प्रेशर को अक्सर “खामोश” (साइलेंट) बीमारी माना जाता है क्योंकि इसके लक्षण आसानी से नज़र नहीं देते, लेकिन इससे धीरे-धीरे दिल तथा ब्लड वेसल को नुकसान पहुंचता है। इस बढ़ते संकट की मुख्य वजह है, सोडियम का अत्यधिक सेवन। विश्व स्वास्थ्य संगठन (वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन – डब्ल्यूएचओ) का अनुमान है कि दुनिया भर में हर साल लगभग 18.9 लाख लोगों की मौत सोडियम के अधिक सेवन की वजह से होती हैं। इससे स्पष्ट है कि यह समस्या कितनी गंभीर है। भारत में नमक रोज़ाना के खाने का महत्वपूर्ण हिस्सा है, साथ ही लोग पैकेटबंद खाद्य पदार्थ भी अधिक मात्रा में खाने लगे हैं, ऐसे में अधिकतर लोग अनजाने में ही तय स्तर से कहीं अधिक सोडियम का सेवन कर लेते हैं।

हाइपरटेंशन की एक बड़ी वजह है, सोडियम का अत्यधिक सेवन। विश्व स्वास्थ्य संगठन की सलाह है कि वयस्कों को रोज़ाना 5 ग्राम से कम नमक (लगभग 2,000 मिलीग्राम सोडियम) का सेवन करना चाहिए, लेकिन अध्ययनों से पता चलता है कि भारत में रोज़ाना लोग 8 से 11 ग्राम के बीच नमक का सेवन करते हैं। हाल में पेश कुछ अनुमानों के अनुसार, आम तौर पर 11 ग्राम का सेवन होता है, जो तय सीमा के मुकाबले दोगुने से भी अधिक है। एक बड़ी चुनौती यह है कि स्वाद की पसंद तय करने में नमक की उल्लेखनीय भूमिका होती है, जिससे लोगों के लिए स्वाद से समझौता किए बिना नमक कम करना मुश्किल हो जाता है।

सोडियम का कम सेवन करना सेहत की बेहतरी के लिए महत्वपूर्ण है। सोडियम के अधिक सेवन से हाइपरटेंशन की आशंका रहती है, जिससे दिल की बीमारी का खतरा बढ़ सकता है।

टाटा सॉल्ट लाइट जैसे उत्पाद, जिनमें आम नमक की तुलना में 15% कम सोडियम होता है। इससे स्वाद को बनाए रखते हुए सोडियम के दैनिक सेवन को नियंत्रित रखा जा सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन जैसी वैश्विक स्वास्थ्य संस्थाएं कम सोडियम वाले विकल्पों को अपनाने की सलाह देती हैं। उनका कहना है कि सोडियम कम करने से हाइपरटेंशन के बेहतर नियंत्रण और दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम करने में मदद मिल सकती है, विशेष तौर पर उन लोगों में जो अधिक सोडियम का सेवन करते हैं।

एम्स (एआईआईएमएस) जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों ने भी बताया है कि यदि उचित मात्रा में इस्तेमाल किया जाए, तो कम सोडियम वाला नमक दिल की सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है। किडनी की बीमारी जैसी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों या कुछ विशेष दवाएं लेने वालों को अपने आहार में किसी भी तरह का बदलाव करने से पहले डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।

भारत में अधिक सोडियम के सेवन से जुड़ी बढ़ती चिंता को दूर करने के लिए आहार में बहुत बड़े बदलाव करने की ज़रूरत नहीं है। छोटे-छोटे और लगातार उठाए गए कदमों से समय के साथ खान-पान से जुड़ी सेहतमंद आदतों को बढ़ावा दिया जा सकता है, जैसे ‘टाटा सॉल्ट लाइट’ जैसे कम सोडियम वाले नमक का इस्तेमाल करना, अधिक नमक वाले पैकेटबंद खाद्य पदार्थ का कम सेवन और सोडियम के छिपे हुए स्रोतों का ध्यान रखना आदि। जानकारी बढ़ाने और सोच-समझकर चुनाव करने से संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली के अंग के तौर पर सेहत बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

यह मामूली सा बदलाव क्यों ज़रूरी है

• कम सोडियम वाले नमक के इस्तेमाल से खान-पान की आदतें बेहतर हो सकती हैं
• संतुलित आहार के साथ इस नमक के इस्तेमाल से सोडियम का सेवन नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है।
• स्वस्थ जीवनशैली के साथ-साथ रक्तचाप को सामान्य बनाए रखने में मदद मिलती है
• खाने में नमक के सोच-समझकर इस्तेमाल को बढ़ावा मिलता है
• घर के खाने का जाना-पहचाना स्वाद बना रहता है
नमक बदलने के साथ-साथ ताज़ा भोजन करें, पैकेटबंद खाद्य पदार्थों का कम सेवन करें और स्वाद बढ़ाने के लिए जड़ी-बूटियों व मसालों का इस्तेमाल करें। इन सेहतमंद आदतों से संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने में मदद मिलती है।

सोडियम के अधिक सेवन से स्वास्थ्य संबंधी कई तरह की परेशानी हो सकती है, लेकिन रोज़मर्रा के भोजन में सेहतमंद विकल्प चुनने से खान-पान की आदतों में सुधार आ सकता है। आज खान-पान से जुड़े समझदारी भरे फैसले करने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने से लंबे समय तक स्वस्थ और बेहतर जीवन जीने में मदद मिल सकती है ।

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