”कल्याण भारती’ कला और संस्कृति से जुड़े सच्चे टैलेंट को दिखाने के लिए बनाया गया था।”

कोलकाता – स्टाफ संवाददाता

कोलकाता में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ‘वसुधा कल्याण आश्रम’ के फाउंडर प्रिंसिपल आचार्य पवन महाराज ने कहा, “‘कल्याण भारती’ आर्ट और कल्चर से जुड़े असली टैलेंट को सामने लाने के लिए बनाई गई थी।”

प्रेस क्लब कोलकाता में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेते हुए आचार्य पवन महाराज ने कहा, “भारत में टैलेंट की कोई कमी नहीं है। ‘कल्याण भारती’ इन्हीं टैलेंट को ढूंढकर दुनिया के सामने लाने के मकसद से बनाई गई थी। यह ध्यान में रखते हुए कि भारत में सूरज पूरब से उगने के बाद रोशनी होती है, ‘कल्याण भारती’ ने पूर्वी भारत में कोलकाता के बीच से ‘वसुधा कल्याण आश्रम’ परिवार की सबसे नई ब्रांच के तौर पर अपनी यात्रा शुरू की है। ‘कल्याण भारती’ का पहला और मुख्य मकसद देश के आर्ट और कल्चर के क्षेत्र में छिपे टैलेंट को खोजना और उन्हें स्थापित करने में मदद करना होगा। आज से, वोकल आर्टिस्ट शिल्पी पाल ‘कल्याण भारती’ की पश्चिम बंगाल ब्रांच की हेड का चार्ज संभाल रही हैं।”

गौरतलब है कि 2020 में बने ‘वसुधा कल्याण आश्रम’ के तहत नए बने ‘कल्याण भारती’ जैसे 17 और सेल हैं। ‘वसुधा कल्याण आश्रम परिवार’ इन सेल के ज़रिए समाज सेवा का काम कर रहा है।

आचार्य पवन महाराज से पश्चिम बंगाल प्रोविंशियल प्रेसिडेंट का पद संभालने के बाद ‘विश्वदर्पण’ को दिए एक खास इंटरव्यू में शिल्पी पाल ने कहा, “अभी ‘कल्याण भारती’ की पश्चिम बंगाल प्रोविंशियल ब्रांच के दूसरे अधिकारियों को चुनना मुमकिन नहीं हो पाया है, ठीक वैसे ही जैसे हम अभी तक ऑर्गनाइज़ेशन के लिए अपना कोई ऑफिस तय नहीं कर पाए हैं। क्योंकि स्टेट या स्टेट ब्रांच अभी पूरी तरह से नहीं बनी हैं, इसलिए अभी यह कहना मुमकिन नहीं है कि हम कलाकारों को कैसे चुनेंगे या टैलेंटेड कलाकारों को दुनिया के सामने कैसे पेश करेंगे! हालांकि, मुझे उम्मीद है कि बहुत जल्द, हमारे स्टेट प्रेसिडेंट की सलाह से, भारत के सभी प्रोविंस ‘कल्याण भारती’ को पूरी तरह से आगे बढ़ा पाएंगे।”

प्रेस कॉन्फ्रेंस के आखिर में आचार्य पवन महाराज ने यह भी कहा, “प्रकृति हमारी असली गुरु है, इसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। यह दुनिया मिट्टी, पानी, आग, हवा और आसमान के पांच तत्वों से बनी है। जिस तरह पारंपरिक मूल्यों वाले लोगों को हमेशा प्रकृति को अपना गुरु मानकर उसका सम्मान करना चाहिए और उसकी रक्षा में लगन दिखानी चाहिए, उसी तरह प्रकृति में रहने वाले जीवों की भलाई के लिए हमेशा सतर्क रहना ज़रूरी है।”

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