ए.आर. रहमान, हरिहरन, सोनू निगम और शान हाजरी 2026 में उस्ताद गुलाम मुस्तफा खान को श्रद्धांजलि देंगे

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कोलकाता – स्टाफ संवाददाता

मुंबई ने हाज़री 2026 में एक दुर्लभ और भावनात्मक संगीतमय शाम का साक्षी बना। बीकेसी स्थित जियो वर्ल्ड गार्डन में पूरी तरह भरे हुए सभागार में आयोजित इस संध्या ने पद्म विभूषण उस्ताद गुलाम मुस्तफ़ा ख़ान की महान विरासत को जीवंत श्रद्धांजलि में बदल दिया। पहली बार, उनके शिष्यों और हमारे समय की सबसे प्रतिष्ठित आवाज़ों ने एक ही मंच साझा किया।

भावनाओं और कृतज्ञता से भरे इस माहौल में ए.आर. रहमान, हरिहरण, सोनू निगम और शान ने सितारों के रूप में नहीं, बल्कि अपने प्रिय उस्ताद के शागिर्द के रूप में मंच साझा किया और उनकी पाँचवीं बरसी पर अपनी ‘हाज़री’ दी।

इस संगीतमय शाम की परिकल्पना और आयोजन उस्ताद साहब की बहू और बेटे – नम्रता गुप्ता ख़ान और रब्बानी मुस्तफ़ा ख़ान द्वारा किया गया, जिन्होंने अपने संस्थान एन आर टैलेंट एंड इवेंट मैनेजमेंट के माध्यम से उनकी विरासत को गरिमा, समर्पण और निरंतरता के साथ आगे बढ़ाया है।

ए.आर. रहमान ने शाम की शुरुआत एक आत्मा को छू लेने वाले सूफ़ी संगीत से की, जिसने पूरे माहौल को इबादत और समर्पण की भावना से भर दिया। ‘कुन फ़ाया कुन’, ‘ख़्वाजा मेरे ख़्वाजा’ और ‘अरज़ियाँ’ के बाद उन्होंने मुस्तफ़ा ब्रदर्स – क़ादिर मुस्तफ़ा, मुर्तज़ा मुस्तफ़ा, रब्बानी मुस्तफ़ा, और उस्ताद साहब के पोते फ़ैज़ मुस्तफ़ा व ज़ैन मुस्तफ़ा के साथ ‘आओ बलमा’ और ‘पिया हाजी अली’ की बेहद भावुक प्रस्तुति दी, जो एक कालजयी और पवित्र क्षण बन गई।

शान ने ‘मैं हूँ डॉन’, ‘चाँद सिफ़ारिश’ और ‘ओम शांति ओम’ के साथ शाम में गर्मजोशी, पुरानी यादें और उल्लास घोला। उन्होंने उस्ताद गुलाम मुस्तफ़ा ख़ान की ग़ज़ल ‘चले आओ’ की भी सुंदर प्रस्तुति दी।

इसके बाद हरिहरण ने ‘तू ही रे’, ‘रोज़ा’, ‘बाहों के दरमियाँ’ और ‘यादें’ जैसी कालजयी धुनों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया, जिन्हें ज़ोरदार तालियों से सराहा गया। सोनू निगम ने ‘परदेसिया’, ‘कल हो ना हो’, ‘अभी मुझ में कहीं’ और ‘संदेसे आते हैं’ जैसे भावनात्मक गीतों के साथ शाम का समापन किया, जिसने दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया।

इस अवसर पर सिनेमा, संस्कृति और संगीत जगत की कई जानी-मानी हस्तियाँ मौजूद रहीं, जिनमें स्मिता ठाकरे, बाबिल ख़ान (मां सुतापा सिकदर के साथ), शेफाली शाह, रोनित बोस रॉय (नीलम बोस रॉय के साथ), कृतिका कामरा, आदर्श गौरव, कविता सेठ (बेटे कनिष्क के साथ), नेहा धूपिया, विशाल जेठवा, अक्षय ओबेरॉय (परिवार के साथ), श्वेता त्रिपाठी, जावेद जाफ़री, राकेश ओमप्रकाश मेहरा, राजू सिंह, शर्ली सिंह, रेशमा मर्चेंट, शिबानी कश्यप, प्राची शाह पांड्या, पारस छाबड़ा, सॉनाली सेहगल, राई लक्ष्मी सहित कई अन्य गणमान्य अतिथि शामिल थे।

एक भावुक क्षण में उस्ताद साहब के परिवार, उनके पुत्रों और पुत्रियों ने मंच पर उपस्थित सभी महान कलाकारों का सम्मान किया।

जैसे ही अंतिम सुर थमे, एक सच्चाई साफ़ झलकती रही… विरासत कभी समाप्त नहीं होती… वह शिष्यों में, गीतों में और ऐसे ही पलों में गूंजती रहती है।

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