भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता: भारतीय ऑफिस स्पेस सेक्टर के लिए एक ऐतिहासिक क्षण अर्चना नायडू, बोर्ड मेंबर और बिजनेस हेड, iKeva

कोलकाता – स्टाफ संवाददाता

iKeva की बोर्ड मेंबर और बिजनेस हेड, अर्चना नायडू के अनुसार, हाल ही में हुए भारत-यूरोपियन यूनियन फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) ने भारतीय ऑफिस स्पेस सेक्टर के लिए एक अहम मोड़ साबित हुआ है और यह मॉडर्न, फ्लेक्सिबल और सस्टेनेबल वर्कस्पेस की डिमांड को काफी तेज़ी से बढ़ाएगा। iKeva साउथ इंडिया में फ्लेक्सिबल, मैनेज्ड वर्कस्पेस और को-वर्किंग सॉल्यूशन देने वाली सबसे बड़ी कंपनी है।

इस एग्रीमेंट को एक ऐतिहासिक डेवलपमेंट बताते हुए, सुश्री नायडू ने कहा, “भारत-EU डील इनवर्ड इन्वेस्टमेंट के लिए एक मजबूत उत्प्रेरक का काम करेगी और ग्लोबल बिजनेस इकोसिस्टम के साथ भारत के जुड़ाव को गहरा करेगी। इसका ऑफिस रियल एस्टेट और फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस सेक्टर पर सीधा और पॉजिटिव असर पड़ेगा।”

भारत में पहले से ही 6,000 से ज़्यादा यूरोपियन कंपनियाँ काम कर रही हैं, ऐसे में उम्मीद है कि यह एग्रीमेंट IT, इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग और R&D-इंटेंसिव सेक्टर में इन्वेस्टमेंट को बढ़ाएगा। इससे ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) और इनोवेशन हब का विस्तार होगा, खासकर हैदराबाद, बेंगलुरु, मुंबई और पुणे जैसे प्रमुख कमर्शियल बाजारों में।

सुश्री नायडू ने आगे कई स्ट्रक्चरल बदलावों पर भी ज़ोर दिया, जिनसे इस सेक्टर का स्वरूप बदलने की उम्मीद है:

फ्लेक्सिबल और मैनेज्ड वर्कस्पेस में ग्रोथ

“महामारी के बाद वर्कप्लेस में आए बदलाव, साथ ही विदेशी कंपनियों द्वारा लागत प्रभावी और स्केलेबल विस्तार मॉडल की तलाश के कारण, 2024 में कुल ऑफिस लीजिंग में फ्लेक्सिबल ऑफिस स्पेस की हिस्सेदारी लगभग 20% हो गई है। भारत-EU एग्रीमेंट इस सेगमेंट में ग्रोथ को और तेज़ी देगा,” उन्होंने कहा।

ग्रीन-सर्टिफाइड बिल्डिंग्स की बढ़ती डिमांड

एग्रीमेंट में क्लाइमेट एक्शन और सर्कुलर इकोनॉमी के सिद्धांतों पर ज़ोर देने से LEED-सर्टिफाइड और ग्रीन-सर्टिफाइड कमर्शियल बिल्डिंग्स की डिमांड बढ़ने की उम्मीद है। सुश्री नायडू ने कहा, “यूरोपियन कंपनियाँ सस्टेनेबिलिटी, एनर्जी एफिशिएंसी और ESG कंप्लायंस पर बहुत ज़ोर देती हैं, जिसका भारत में भविष्य के ऑफिस डेवलपमेंट पर काफी असर पड़ेगा।”

प्रोफेशनल सर्विसेज़ का विस्तार

बढ़े हुए द्विपक्षीय व्यापार और क्रॉस-बॉर्डर ऑपरेशंस से कंसल्टेंसी, लीगल, फाइनेंशियल और प्रोफेशनल सर्विसेज़ में भी ग्रोथ होगी, जिससे भारत के प्रमुख शहरों के सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट में प्रीमियम ऑफिस स्पेस की डिमांड बढ़ेगी।

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