कोलकाता – स्टाफ संवाददाता
डिजिटल ज़माने में, जब फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बन गए हैं, तो उसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके समाज की एक बड़ी समस्या को हल करने के लिए एक नई पहल ‘बुक अ मील’ सामने आई है। इस नॉन-प्रॉफिट प्लेटफॉर्म का मकसद देश के गरीब और कुपोषित बच्चों तक खाना पहुंचाना है।
इस प्लेटफॉर्म पर, जो स्विगी और ज़ोमैटो जैसे पॉपुलर ऐप की तरह बनाया गया है, यूज़र खाना ऑर्डर करने की तरह ही अलग-अलग मेन्यू से खाना चुन सकते हैं। हालांकि, यह खाना उनके घरों तक नहीं पहुंचता; बल्कि यह झुग्गी-झोपड़ियों, शेल्टर और कम इनकम वाले परिवारों के बच्चों तक पहुंचता है। वेबसाइट बिल्कुल एक नॉर्मल फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म की तरह दिखती है। यहां अलग-अलग तरह के इंडियन खाने की लिस्ट है, जिसमें नॉर्थ इंडियन थाली, साउथ इंडियन खाना, वेजिटेरियन और नॉन-वेजिटेरियन डिश, फल और कई तरह के पौष्टिक खाने शामिल हैं। यूज़र अपनी पसंद के हिसाब से खाना चुन सकते हैं और उसे डोनेशन के तौर पर ऑर्डर कर सकते हैं। ऑर्डर देने के बाद, डोनेशन एक बैकएंड सिस्टम के ज़रिए वॉलंटियर्स और पार्टनर किचन तक पहुँचता है। वहाँ खाना तैयार होता है, जिसे बाद में ज़रूरतमंद बच्चों और बेसहारा लोगों में बाँटा जाता है। इस वजह से, डिजिटल सुविधाओं को बनाए रखते हुए असल ज़िंदगी में फ़ूड सिक्योरिटी का एक असरदार सिस्टम बनाया जा रहा है।

ऑर्गनाइज़ेशन के मुताबिक, इस पहल का मुख्य आइडिया डोनेशन प्रोसेस को आसान और जाना-पहचाना बनाना था। जहाँ लोग कुछ ही सेकंड में बिरयानी या इडली ऑर्डर कर सकें, वहीं डोनेशन के लिए कोई मुश्किल सिस्टम न हो।
अभी, ऑर्गनाइज़ेशन हर दिन एक हज़ार से ज़्यादा लोगों को खाना दे रहा है और इसका दायरा धीरे-धीरे बढ़ रहा है। वे खास तौर पर बच्चों में कुपोषण को खत्म करने पर ध्यान दे रहे हैं। कई कम विकसित स्कूलों के साथ मिलकर एक मिड-डे मील सिस्टम पहले ही शुरू किया जा चुका है, ताकि पढ़ाई के साथ-साथ न्यूट्रिशन पर भी नज़र रखी जा सके।
इसके अलावा, अनाथालयों और शेल्टर के साथ काम करके छोड़े गए बच्चों के लिए रेगुलर खाना पक्का करने की पहल की गई है।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, भारत में कुपोषण की समस्या सिर्फ़ ग्रामीण इलाकों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि शहरी झुग्गियों और कम आय वाले इलाकों में भी फैली हुई है। इस संदर्भ में, ‘बुक अ मील’ जैसी पहल सीधे खाना पहुंचाकर समस्या को हल करने में अहम भूमिका निभा सकती है। कई लोगों का मानना है कि डिजिटल टेक्नोलॉजी का यह नया इस्तेमाल भविष्य में समाज सेवा के क्षेत्र में एक नई दिशा दिखा सकता है।
