कोलकाता – स्टाफ संवाददाता
भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) द्वारा एफसीएनआर (बी) जमा के ज़रिए विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ाने के लिए हाल में उठाए गए कदमों से, वाह्य क्षेत्र की स्थिति को मज़बूत करने और विदेशी मुद्रा की तरलता (लिक्विडिटी) बढ़ाने की दिशा में भारत का सक्रिय और दूरदर्शी दृष्टिकोण रेखांकित होता है। इस पहल से प्रवासी भारतीयों (एनआरआई) की भागीदारी को बढ़ावा और देश के व्यापक आर्थिक विकास के लक्ष्यों को समर्थन मिलने की उम्मीद है।
उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक के रिटेल लायबिलिटीज़ (खुदरा उत्तरदायित्व), टीएएससी और टीपीपी प्रमुख, श्री हितेन्द्र झा ने कहा, “आरबीआई के इस बेहद अनुकूल समय पर लिए गए निर्णय से भारत की वित्तीय प्रणाली में भरोसा बढ़ेगा और प्रवासी भारतीयों के लिए देश की वृद्धि की संभावना में भाग लेने का आकर्षक ज़रिया तैयार होगा। इस पहल से बैंकिंग प्रणाली में विदेशी मुद्रा प्रवाह में स्थायित्व आने की उम्मीद है, जिससे वित्तीय स्थिरता में मदद मिलेगी और भारत की वाह्य स्थिति मज़बूत होगी।
उज्जीवन एसएफबी नवोन्मेषी, ग्राहक-केंद्रित बैंकिंग समाधानों के ज़रिए आरबीआई के दृष्टिकोण का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिनसे ग्राहकों के लिए दीर्घकालिक स्तर पर प्रभावी मूल्य का निर्माण होता है, साथ ही ये भारत की आर्थिक प्रगति में सार्थक योगदान देते हैं।”
उज्जीवन एसएफबी, मूल्य-आधारित समाधान प्रदान करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के तहत, अभी तीन से पांच की अवधि के लिए डॉलर में एफसीएनआर (बी) जमा पर 7.13% सालाना तक की ब्याज दर प्रदान कर रहा है, जो इस उद्योग में उपलब्ध सबसे प्रतिस्पर्धी दरों में से एक है।
बेहतर एफसीएनआर (बी) ढांचे से विदेशी मुद्रा भंडार में सकारात्मक योगदान मिलने की आशा है, साथ ही इससे ग्राहकों को सुरक्षित और लाभप्रद निवेश के अवसर भी मिलेंगे। ऐसी पहलों से वैश्विक बचत और निवेश के लिए पसंदीदा गंतव्य के तौर पर भारत की स्थिति और मज़बूत होगी।
