तकनीकी संगोष्ठी में हिन्दी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के समन्वय पर जोर

कोलकाता – स्टाफ संवाददाता

स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड, केंद्रीय विपणन संगठन के समन्वयन एवं अध्यक्षता में संचालित नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (उपक्रम-2), कोलकाता के सदस्य कार्यालय ऑयल इंडिया लिमिटेड के परिसर के भव्य सभागार में आयोजित “हिन्दी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं भाषा प्रौद्योगिकी : डिजिटल कार्यसंस्कृति की नई दिशा” विषय पर तकनीकी संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता ऑयल इंडिया लिमिटेड के महाप्रबंधक श्री निरुपम ज्योति सैकिया ने की। भारत सरकार के राजभाषा विभाग के उपनिदेशक (कार्यान्वयन) डॉ.विचित्रसेन गुप्त विशिष्ट अतिथि तथा प्रख्यात सॉफ्टवेयर विशेषज्ञ एवं पूर्व आरबीआई अधिकारी श्री ओम प्रकाश अग्रवाल मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। नराकास (उपक्रम-2), कोलकाता के सदस्य-सह-सचिव श्री अजय शंकर मिश्र सहित विभिन्न सदस्य कार्यालयों के अधिकारीगण भी उपस्थित रहे। श्री मिश्र ने इस संगोष्ठी के मुख्य उद्देश्य पर ध्यान आकर्षित करते हुए सदस्यों को कहा कि यह मंच हम सभी के लिए मिलकर ऐसे तकनीकी साधनों, सॉफ्टवेयर तथा डिजिटल उपकरणों पर चर्चा करना है,जो हमारे दैनिक सरकारी कार्यों को और अधिक सुगम, पारदर्शी और राजभाषा-अनुकूल बना सकें।

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में श्री निरुपम ज्योति सैकिया ने कहा कि वर्तमान डिजिटल युग में हिन्दी को तकनीकी रूप से सशक्त बनाना समय की आवश्यकता है। एआई एवं सूचना प्रौद्योगिकी के प्रभावी उपयोग से हिन्दी में कार्य की गति, गुणवत्ता और दक्षता को नई दिशा दी जा सकती है।

विशिष्ट अतिथि डॉ.विचित्रसेन गुप्त ने कहा कि “तकनीक हिन्दी का विकल्प नहीं, बल्कि हिन्दी को और अधिक सशक्त बनाने का माध्यम है।” उन्होंने कहा कि एआई एवं आधुनिक आईटी उपकरण राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार और कार्यान्वयन को अधिक सरल, त्वरित एवं परिणामोन्मुख बना सकते हैं। उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों से नई तकनीकों को सीखने तथा हिन्दी को डिजिटल युग की सशक्त कार्यभाषा बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने ई-ऑफिस, डिजिटल दस्तावेज, मशीन अनुवाद, सोशल मीडिया एवं अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हिन्दी के व्यापक उपयोग की आवश्यकता भी रेखांकित की।

मुख्य वक्ता श्री ओम प्रकाश अग्रवाल ने एआई एवं भाषा प्रौद्योगिकी के व्यावहारिक उपयोग पर सारगर्भित प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि एआई के माध्यम से हिन्दी में मसौदा तैयार करने, अनुवाद, संपादन, संक्षेपण, सूचना विश्लेषण, दस्तावेज रूपांतरण एवं डिजिटल सामग्री निर्माण जैसे कार्य सरल और कम समय में किए जा सकते हैं। उन्होंने विभिन्न एआई उपकरणों के व्यावहारिक उपयोग का प्रदर्शन भी किया।

कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन ऑयल इंडिया लिमिटेड, कोलकाता के महाप्रबंधक (राजभाषा) डॉ. विजय मोहन बरेजा ने किया। संगोष्ठी का संदेश रहा कि “तकनीक से सशक्त हिन्दी, हिन्दी से सशक्त भारत” की दिशा में एआई एवं भाषा प्रौद्योगिकी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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