कोलकाता – स्टाफ संवाददाता
हर साल की तरह इस साल भी श्री श्री मनसा पूजा विसर्जन के मौके पर कनमारी में पारंपरिक बोट रेस कॉम्पिटिशन का आयोजन किया गया। भारत सेवाश्रम संघ और कनमारी मत्स्य बाजार कमेटी के मिलकर आयोजित इस कॉम्पिटिशन को लेकर लोकल लोगों में काफी उत्साह और जोश था। बोट रेस कॉम्पिटिशन का उद्घाटन भारत सेवाश्रम संघ मैनेजमेंट कमेटी के सदस्यों में से एक पूज्यपाद स्वामी दिव्यानंदजी महाराज ने किया। स्वामी बिमुक्तानंदजी महाराज और संघ के कई अन्य प्रमुख साधु और अन्य प्रमुख लोग इस कार्यक्रम में मौजूद थे। उनकी मौजूदगी में, कॉम्पिटिशन एक तय जगह से शुरू हुआ। इलाके के लोग नदी किनारे एक के बाद एक बोट कॉम्पिटिशन देखने के लिए इकट्ठा हुए। कनमारी बाजार से सटे इलाके के कई क्लबों की पहल पर हर साल श्री श्री मनसा पूजा का आयोजन किया जाता है। इस पूजा और मेले के आसपास के इलाके में एक पुरानी परंपरा बन गई है। लोकल सूत्रों के मुताबिक, यह मेला लगभग 70 सालों से लग रहा है। समय के साथ हुए बदलावों के बावजूद, मनसा पूजा और मेले को लेकर स्थानीय लोगों का

जुनून आज भी बरकरार है। भारत सेवाश्रम संघ का कनमारी ग्रामीण सेवा केंद्र भी इस लंबी परंपरा से जुड़ा है। इलाके की संस्कृति और परंपरा को बनाए रखने के साथ-साथ स्थानीय लोगों से रिश्ता मजबूत करने के लिए, संघ लंबे समय से मेले के साथ-साथ बोट रेसिंग प्रतियोगिताएं आयोजित करता आ रहा है।
इस प्रतियोगिता को लेकर न सिर्फ प्रतियोगियों में बल्कि दर्शकों में भी काफी उत्साह था। कई लोगों ने नदी के दोनों किनारों पर खड़े होकर बोट रेसिंग का आनंद लिया। स्थानीय संस्कृति और ग्रामीण परंपरा से जुड़ी यह प्रतियोगिता नई पीढ़ी को परंपरा से अवगत कराने का एक जरिया बन गई है। भारत सेवाश्रम संघ के एक बड़े भक्त और प्रवासी बंगाली डॉक्टर डॉ. शंभूनाथ चौधरी इस बोट रेसिंग प्रतियोगिता को पूरा सहयोग दे रहे हैं। वह अपने माता-पिता की याद में इस प्रतियोगिता से जुड़े हैं।
आयोजकों के अनुसार, आधुनिकता के साथ आगे बढ़ते हुए इलाके की पुरानी संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और लोक मनोरंजन को जिंदा रखना जरूरी है। इसी उद्देश्य से हर साल मनसा पूजा के विसर्जन के अवसर पर यह बोट रेस आयोजित की जाती है।
