कोलकाता – स्टाफ संवाददाता
पश्चिम बंगाल सरकार के कृषि विपणन एवं पंचायत तथा ग्रामीण विकास विभाग के माननीय प्रभारी मंत्री श्री दिलीप घोष ने 23 सितंबर 2026 को कोलकाता के न्यू टाउन स्थित IIT खड़गपुर रिसर्च पार्क में आयोजित एक कार्यक्रम में पूर्वी क्षेत्र में खाद्य तेल मूल्य शृंखला को सुदृढ़ करने हेतु NDDB की पहल का शुभारंभ किया। इस अवसर पर पश्चिम बंगाल सरकार के सहकारिता एवं खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के माननीय मंत्री श्री अशोक कीर्तानिया विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। कार्यक्रम में NDDB के अध्यक्ष डॉ. मीनेश शाह, IIT खड़गपुर के निदेशक प्रो. सुमन चक्रवर्ती (वर्चुअल माध्यम से), पश्चिम बंगाल सरकार, ICAR, NABARD और NDDB के वरिष्ठ अधिकारी तथा डेयरी सहकारी समितियों, किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) और किसानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान NDDB और IIT खड़गपुर ने खाद्य तेल क्षेत्र में अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास, क्षेत्रीय सत्यापन, क्षमता निर्माण, फसलोत्तर प्रबंधन, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इस साझेदारी के अंतर्गत किसान संस्थाओं, सहकारी समितियों, FPOs और क्षेत्रीय स्तर पर कार्यान्वयन में NDDB के अनुभव को अनुसंधान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, डेटा विश्लेषण तथा फसलोत्तर प्रणालियों में IIT खड़गपुर की विशेषज्ञता के साथ जोड़ा जाएगा। इस पहल को ICAR, BARC, KVKs और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों से तकनीकी सहयोग प्राप्त होगा। शुभारंभ कार्यक्रम के अंतर्गत सहभागी किसानों को बीज मिनीकिट वितरित किए गए, जिससे क्षेत्रीय स्तर पर हस्तक्षेपों की शुरुआत हुई।
इस अवसर पर पश्चिम बंगाल सरकार के कृषि विपणन एवं पंचायत तथा ग्रामीण विकास विभाग के माननीय मंत्री श्री दिलीप घोष ने सरसों, मूंगफली, सूरजमुखी और तिल जैसी तिलहन फसलों पर ध्यान केंद्रित करते हुए तिलहन की खेती के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने के पश्चिम बंगाल के लक्ष्य को रेखांकित किया। कृषि विपणन विभाग किसानों की उपज के एकत्रीकरण, भंडारण, प्रसंस्करण और विपणन तक उनकी पहुंच को बेहतर बनाएगा, जिससे फसलोत्तर नुकसान कम करने और ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। दूध उत्पादन और उसकी गुणवत्ता को सुदृढ़ करने के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि किसानों की आजीविका में सुधार के लिए मौजूदा डेयरी सहकारी नेटवर्क में तिलहन उत्पादन को भी एकीकृत किया जाना चाहिए। माननीय मंत्री ने किसानों के लिए प्रशिक्षण, ऋण सहायता और बीमा सुविधाएं उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
सहकारी समितियों के साथ सहयोग से छोटे किसानों को बेहतर सौदेबाजी क्षमता प्राप्त होगी। माननीय मंत्री ने कहा कि NDDB-IIT खड़गपुर साझेदारी किफायती प्रौद्योगिकियां उपलब्ध कराने के साथ-साथ खाद्य तेलों की खरीद और विपणन को सुगम बनाएगी। NDDB की विशेषज्ञता की सराहना करते हुए श्री घोष ने कहा कि पश्चिम बंगाल के लोग राज्य के कृषि बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने में NDDB की सक्रिय भूमिका की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

खाद्य तेल मूल्य शृंखला को सुदृढ़ करने की इस पहल की सराहना करते हुए पश्चिम बंगाल सरकार के सहकारिता तथा खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के माननीय मंत्री श्री अशोक कीर्तानिया ने सुझाव दिया कि इसी प्रकार की पहल दालों के क्षेत्र के लिए भी विचार की जा सकती है। उन्होंने कहा कि घरेलू उत्पादन में वृद्धि से आयात कम करने में मदद मिलेगी और उपभोक्ताओं को लाभ होगा। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार और NDDB के साझा उद्देश्यों से यह सुनिश्चित होगा कि कृषि मूल्य शृंखलाओं का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचे और बिचौलियों की भूमिका कम हो। माननीय मंत्री ने NDDB को विश्वसनीय किसान-केंद्रित ब्रांड विकसित करने के लिए भी प्रोत्साहित किया, जो उत्पादकों को अपना उत्पादन बढ़ाने में सहायता कर सकें तथा उन्हें बाजार और उपभोक्ताओं से सीधे जुड़ने में सक्षम बना सकें।
NDDB के अध्यक्ष डॉ. मीनेश शाह ने कहा कि घरेलू तिलहन उत्पादन तथा इससे जुड़ी मूल्य शृंखला को सुदृढ़ करना NDDB के लिए एक केंद्रित क्षेत्र है। भारत सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन (NMEO) के अंतर्गत इस क्षेत्र को उच्च प्राथमिकता दी है। NDDB किसान-स्वामित्व वाली संस्थाओं के निर्माण और तिलहन क्षेत्र में अपने अनुभव के आधार पर डेयरी सहकारी समितियों और FPOs के माध्यम से विभिन्न हस्तक्षेप कर रहा है। इसमें ऑपरेशन गोल्डन फ्लो, तिलहन सहकारी समितियों और धारा ब्रांड से जुड़ा उसका अनुभव भी शामिल है।
उन्होंने तिलहन की खेती को डेयरी फार्मिंग और संबद्ध गतिविधियों के साथ एकीकृत करने की संभावनाओं का भी उल्लेख किया। तिलहन के उप-उत्पादों, कृषि अवशेषों और डेयरी अपशिष्ट का उपयोग चक्रीय अर्थव्यवस्था आधारित दृष्टिकोण को बढ़ावा दे सकता है, संसाधनों के बेहतर उपयोग में योगदान दे सकता है तथा किसानों की आय के स्रोतों में विविधता ला सकता है।
इस पहल का शुभारंभ और MoU पर हस्ताक्षर पूर्वी क्षेत्र में खाद्य तेल मूल्य शृंखला को सुदृढ़ करने के लिए दीर्घकालिक सहयोग की शुरुआत का प्रतीक है। इसके अंतर्गत किसान-केंद्रित और सहकारी-नेतृत्व वाले दृष्टिकोण के माध्यम से घरेलू तिलहन उत्पादन, उपज का एकत्रीकरण, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और बाजार संपर्क को बढ़ावा दिया जाएगा।
