रमेश राय – दक्षिण 24 परगना
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गंगासागर मेले को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि भले ही इसे औपचारिक रूप से राष्ट्रीय मेला घोषित नहीं किया गया हो, लेकिन जनता की अदालत में यह पहले ही राष्ट्रीय मेले का दर्जा पा चुका है। उन्होंने कहा कि बार-बार अनुरोध के बावजूद गंगासागर को राष्ट्रीय मेला घोषित नहीं किया गया।
गंगासागर ब्रिज के शिलान्यास के बाद आयोजित कार्यक्रम में कापिल मुनि मंदिर के पुजारी संजय दास ने मुख्यमंत्री को सेतु शिलान्यास के लिए धन्यवाद दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र से कोई सहायता नहीं मिलने के बावजूद राज्य सरकार अपने बल पर गंगासागर ब्रिज का निर्माण कर रही है। यह परियोजना एल एंड टी द्वारा बनाई जाएगी और अगले दो-तीन वर्षों में इसके पूरा होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि ब्रिज बनने से लाखों लोगों को आवागमन में सुविधा मिलेगी और पूरे क्षेत्र की आर्थिक तस्वीर बदल जाएगी।
मुख्यमंत्री ने दक्षिण 24 परगना जिले के लिए कई परियोजनाओं का उद्घाटन किया और गंगासागर मेले की कथित उपेक्षा को लेकर राज्य और केंद्र के भाजपा नेताओं की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार कुंभ मेले पर करोड़ों रुपये खर्च कर सकती है, लेकिन गंगासागर

मेले के लिए एक पैसा भी नहीं देती। इसके बावजूद राज्य सरकार ने मेले में आने वाले प्रत्येक तीर्थयात्री के लिए पांच लाख रुपये का बीमा किया है। उन्होंने बताया कि 9 से 17 जनवरी तक कई मंत्री और अधिकारी मेले को सुव्यवस्थित और सुंदर बनाने में जुटे रहे।
बिना नाम लिए विपक्षी नेता पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां कोई “गद्दार” आकर भ्रामक बातें कह गया, जिसे यह भी नहीं पता कि राज्य सरकार में गंगासागर ब्रिज बनाने की क्षमता है। उन्होंने दोहराया कि उनकी सरकार सभी धर्मों के लिए काम करती है।
मुख्यमंत्री ने उत्तर 24 परगना के अशोकनगर के लिए भी परियोजनाओं की घोषणा की। मंच से उन्होंने एसआईआर मुद्दे को लेकर केंद्र की आलोचना करते हुए कहा कि बंगाल में डिटेंशन कैंप नहीं बनने दिए जाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि 70-80 वर्षों से बंगाल में रह रहे लोगों से भी नागरिकता साबित करने के लिए लाइन लगवाई जा रही है और भाजपा लोगों को परेशानी में डालकर खुश हो रही है। उन्होंने कहा कि एआई के जरिए नागरिकता छीनने की कोशिश की जा रही है, जिसे बंगाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जरूरत पड़ी तो नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट तक जाया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि एसआईआर के नाम पर जबरदस्ती के चलते बंगाल में 81 लोगों की जान गई है और इसके लिए चुनाव आयोग की अदूरदर्शिता जिम्मेदार है। पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए उन्होंने कहा कि बंगाल कभी सिर नहीं झुकाएगा और दिल्ली के “जमींदारों” को बंगाल के इतिहास को याद रखना चाहिए।
