कोलकाता में इमर्सिव स्पोर्ट्स प्रदर्शनी के माध्यम से टाटा स्टील ने सर दोराबजी टाटा की विरासत का किया सम्मान

कोलकाता – स्टाफ संवाददाता

टाटा स्टील ने अपने प्रथम चेयरमैन सर दोराबजी टाटा की जयंती के अवसर पर कोलकाता स्थित टाटा सेंटर के एट्रियम में “Celebration of Sports: The Sir Dorabji Tata Legacy” नामक एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन कर उनकी विरासत का स्मरण किया। इस आयोजन में राष्ट्र निर्माण, औद्योगिक विकास तथा भारत में संगठित खेल और ओलंपिक आंदोलन के विकास में उनके अमूल्य योगदान को सम्मानित किया गया।

इस समारोह का मुख्य आकर्षण टाटा स्टील द्वारा संकल्पित, डिजाइन और तैयार की गई एक इमर्सिव स्पोर्ट्स प्रदर्शनी रही, जिसमें दुर्लभ स्मृति-चिह्न, अभिलेखीय तस्वीरें और खेल से जुड़ी ऐतिहासिक वस्तुओं को प्रदर्शित किया गया।

प्रदर्शनी में भारतीय खेल के प्रति सर दोराबजी टाटा की दूरदर्शी सोच को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। इसमें 1920 के एंटवर्प ओलंपिक में भारत की भागीदारी को व्यक्तिगत रूप से वित्तपोषित करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को भी दर्शाया गया, जिसके माध्यम से भारत अपना पहला ओलंपिक दल भेज सका। उन्होंने भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) की स्थापना में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और 1927 में इसके प्रथम अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। यह प्रदर्शनी 2027 में होने वाले IOA के शताब्दी समारोह की पूर्वपीठिका के रूप में भी काम करेगी।

इस कार्यक्रम का संयुक्त रूप से उद्घाटन टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट, मार्केटिंग एंड सेल्स, श्री आशीष अनुपम और टाटा एम्प्लॉइज यूनियन के अध्यक्ष श्री इंद्रजीत बोस ने किया। खेल संबंधी ऐतिहासिक वस्तुओं का संकलन और क्यूरेशन प्रसिद्ध खेल इतिहासकार श्री बोरिया मजूमदार ने किया है।

प्रदर्शनी के वॉकथ्रू के बाद “A Celebration of Sports” विषय पर एक पैनल चर्चा आयोजित की गई। इसमें खेल इतिहासकार श्री बोरिया मजूमदार, ओलंपियन तीरंदाज एवं अर्जुन पुरस्कार विजेता श्री राहुल बनर्जी, पूर्व अंतरराष्ट्रीय एथलीट एवं अर्जुन पुरस्कार विजेता सुश्री सोमा बिस्वास और टाटा स्टील के चीफ ऑफ मार्केटिंग एंड सेल्स, ब्रांडेड प्रोडक्ट्स एंड रिटेल, श्री प्रवीण श्रीवास्तव ने भाग लिया। पैनल में भारतीय खेलों के विकास तथा खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और एक मजबूत खेल इकोसिस्टम के निर्माण के प्रति टाटा स्टील की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता पर चर्चा की गई।

सर दोराबजी टाटा की विरासत केवल खेलों तक सीमित नहीं थी। टाटा स्टील, जिसे उस समय TISCO के नाम से जाना जाता था, के नेतृत्वकर्ता के रूप में उन्होंने कंपनी को कई चुनौतीपूर्ण दौरों से निकाला। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान टाटा स्टील ने लगभग 2,90,000 टन स्टील की आपूर्ति की। ग्रेट डिप्रेशन के दौरान उन्होंने कंपनी को सुरक्षित रखने और अपने कर्मचारियों की आजीविका की रक्षा के लिए प्रसिद्ध जुबली डायमंड सहित अपनी व्यक्तिगत संपत्ति तक गिरवी रखने की पेशकश की। उनकी असाधारण विरासत खेल, उद्योग और राष्ट्र निर्माण—तीनों क्षेत्रों में फैली हुई थी और यह संस्थान निर्माण तथा व्यापक राष्ट्रीय हित के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

इस समारोह ने रेखांकित किया कि सर दोराबजी टाटा के दूरदर्शी प्रयासों ने एक सदी से भी पहले भारत की खेल संबंधी आकांक्षाओं की नींव रखी थी। साथ ही, इसने विभिन्न खेल विधाओं में खेल प्रतिभाओं को समर्थन देने और उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के प्रति टाटा स्टील की निरंतर प्रतिबद्धता को भी दोहराया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *