साधु समाज के लिए जीता है, और क्या चाहिए

रमेश राय – गंगासागर

गंगासागर मेले में इस वर्ष एक नया और ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला। पहली बार तृतीय लिंग (किन्नर) साधुओं ने गंगासागर में पवित्र स्नान किया। गुरुवार को संगम में डुबकी लगाने से पहले उनके उत्साह और उल्लास ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। साधु 2 नंबर घाट के पास से स्नान के लिए उतरे, जहां उन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्र हो गए।

किन्नर साधुओं ने बताया कि वे पहली बार गंगासागर आए हैं और उनके लिए अलग से अखाड़े की व्यवस्था की गई है। हालांकि, सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उन्होंने हल्की नाराज़गी भी जाहिर की। उनका कहना था कि उनके लिए किसी तरह के बाउंसर या विशेष सुरक्षा की जरूरत नहीं है। “हम समाज के बीच रहना चाहते हैं, साधु तो समाज के लिए ही जीता है, और क्या चाहिए,” उन्होंने कहा।

साधुओं ने यह भी आरोप लगाया कि इस बार प्रशासन की ओर से उन्हें किसी प्रकार की विशेष सहायता नहीं मिली। फिर भी उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में सहयोग मिलेगा। उन्होंने कहा कि वे भविष्य में फिर गंगासागर आएंगे और पुनः पवित्र स्नान करेंगे।

किन्नर साधुओं ने बताया कि वे वाराणसी के बेनारस अखाड़े से आए हैं। बातचीत के बाद वे 1 नंबर घाट से गंगासागर संगम में डुबकी लगाने पहुंचे। उनके इस आध्यात्मिक आगमन ने मेले को एक नई सामाजिक और धार्मिक पहचान दी है।

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